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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल

Ishrat Alig

1 कविता

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कान्हा ही नहीं पागल राधा भी दीवानी है ;
ये प्यार मोहब्बत की अनमोल कहानी है।

तुमको ये वफ़ा का मैं जो गीत सुनाता हूँ ;
अंदाज़ नया है पर ये बात पुरानी है।

गूँजे हैं मधुवन में बुलबुल का ये गाना जो ;
सदियों से चली आई मीरा की निशानी है।

तालाश हमें उसकी जो आँख नज़र रक्खे ;
बस उसके ही साए में ये उम्र बितानी है।

सीखा है कहाँ तुमने लिखने का हुनर इशरत ;
बातें भी लुभाती हैं, लहजे में रवानी है।

- Ishrat Hasan

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