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मेरे अल्फाज़

कोरोना को रोना होगा

Kavi Hari

77 कविताएं

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कोरोना को रोना होगा
सूर्यदेव के सामने।

अवतरित होने वाले हैं
तीक्ष्ण वार होने वाले हैं
दानव-दल रोने वाले हैं
शत्रु अब सोने वाले हैं
निज राष्ट्र ना कोना होगा
कोरोना को रोना होगा
सूर्यदेव के सामने।

अग्नि का गोला बरसेगा
जिंदगी को वो तरसेगा
चिल्लाते ही दम निकलेगा
वो भला कैसे गरजेगा ?
उसका ना जादू-टोना होगा
कोरोना को रोना होगा
सूर्यदेव के सामने।

तौबा-तौबा वह करेगा
झुलस-झुलस कर वह मरेगा
देवों का आशीष हो जिसपर
क्यों भला इंडिया डरेगा
उसको ही सबकुछ खोना होगा
कोरोना को रोना होगा
सूर्यदेव के सामने।

-कवि हरि शंकर, पटना

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