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मेरे अल्फाज़

सच कहूं तो यकीन नहीं होगा

Ksk Aaj

3 कविताएं

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साजन ने सजनी से कहा
तुम नहीं रखती मेरा ख्याल
तब एक मुस्कान के साथ
जीवन साथी ने क्या कहा
तुम्हें सच कहूं तो यकीन नहीं होगां
झूठ बोला नहीं तुमसे कभी
प्यार जो आधा-अधूरा ख़ुद में है
उसे तुम्हें पाकर पूरा कर लिया हमने
सच कहूं तो यकीन नहीं होगा
जब होते हो साथ नज़रे झुका कर
तुम्हें सुकुन से देखा करती हूं
तुम्हें लगता हम तुम पर नज़रें इनायत नहीं करते
तुम्हें क्या पता है, जब पास नहीं होते हर काम के साथ
अपलक दरवाजे पर नज़रें टीकी होती हैं
एक फोन की घंटी पर दौड़ी भागी जाती हूं मैं
कि कहीं फोन तुमने ना किया हो
जताना जरूरी नहीं समझा
आपकी आखों में ख़ुद को ढूंढा हैं हमेशा
सच कहूं तो यकीन नहीं होगा
तुम कह कर देखो पलक झपकने से
पहले अपनी सांसें भी दे दूं तुम्हें
सच कहूं तो यकीन नहीं होगा


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