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मेरे अल्फाज़

मनभावन सावन

Anonymous User

10 कविताएं

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रिमझिम-रिमझिम फुहारें लेकर
मनभावन सावन आया है।
ठंडी-ठंडी पवन के झकोरों,ने
तन-मन को महकाया है
घनघोर घटाओं की बारिश ,से
धरा-धुलकर निखरी लगती है
नीलगगन में उगे इंद्रधनुष, ने
बच्चों के मन को भाया है
रिमझिम-रिमझिम फुहारें लेकर
मनभावन सावन आया है।

पानी की बूंदों को छूकर
बचपन की यादों में खो जाना
बनाकर कागज की नावें
भरे ताल में तैराना
कजरी की संगीते सुनना
हमजोली के संग, बारिश में भीगना
बादल की छटाओं के नीचे
मयूर का नृत्य मनभाया है
रिमझिम-रिमझिम फुहारें लेकर
मनभावन सावन आया है।

मनोहर लगे हवा से लहराते
तरंग सा वो ताल का पानी
बूंदों ने है मोती बिखेरे
पौधों की पंखुड़ियों पर
सावन ने रंगीन फिजाएं सजाई
धरा ने धानी चूनर ओढ़ी
बिजली कि चमक और बादल की गरज
ने,वसुधा पर मोती बरसाया है
रिमझिम-रिमझिम फुहारें लेकर
मनभावन सावन आया है।

तन-मन को अहसास कराते
नए ताजगी से ए सावन
त्योहारों का है इसमें संगम
तीज,नागपंचमी और रक्षाबंधन
तिरंगे के रंग में रंगा है,भारत
आजादी का यह मौसम,सावन
झूला-झूलकर आनन्द उठाते
बालक,बालिका और वृद्धजन
भाई-बहन के पावन रिश्ते,ने
सबका अभिमान बढ़ाया है
रिमझिम-रिमझिम फुहारें लेकर
मनभावन सावन आया है।

काँवड़-यात्रा में जाते भक्तगण
शिवालयों में होता,शिवगौरी का कीर्तन
स्नेह का अद्भुत संचार बढ़ाये
जीवनसाथी के बीच अलौकिक
मौसम ने ली है अंगड़ाई
खेतों में हरियाली छायी
वन-उपवन के सौन्दर्य में,खोकर
खग-मृग ने अनुराग रचाया है
रिमझिम-रिमझिम फुहारें लेकर
मनभावन सावन आया है।
-कवि सुनील गुरु   


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