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मेरे अल्फाज़

अखण्ड भारत

Laxmansingh Sodha

30 कविताएं

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अखंड प्रकाशमय ज्योति जली
कोरोना से जंग लड़ने एक सूत्र में
भारत की नाव चली
रोशन हुई संपूर्ण भारती
गूंजी गगन भारत की आरती
जय घोष शंख बजा
नारे जयकारे से कंठ सजा
दीवारे हर घर हर गली
मिली मुझे सजी-धजी
अखंड प्रकाशमय ज्योति जली
कोरोना से लड़ने एकसूत्र में
भारत की नाव चली
दिखी नई मिसाल एकजुटता
दिखा भाईचारे एकता नया स्वर्ण दीप
कहीं मोंम कहीं घी के दीये
कहीं लाख सजा श्रृंगार
रहेंगे यह हर पल यादगार
यह रौनक देख प्रसन हुआ मन
स्वस्थ होगा भारत का तन
अखंड प्रकाशमय ज्योति जली
कोरोना से लड़ने एक सूत्र में
भारत की नाव चली
गुंजा विश्व में भारत का नारा
सबसे निराला देश हमारा
कंधे से कंधा मिलाकर चले
स्वस्थ संकल्प लिए हाथ में
दीपों की माला जगमग उठी
हर घर में छाई मस्ती मस्तानी
सावधान और सुरक्षित प्रहरी
ऐसे है हम हिंदुस्तानी
न डरे न झुके सामने खड़े
संकल्प से शत्रु से लड़े
हौसला हमारा बढ़ता रहे
हम यूं ही कदम से कदम
मिला कर चलते रहे
ए हिंदुस्ता बला अभी टली नहीं है
सड़कों बाजारों में जाना नहीं है
बस लक्ष्मण रेखा का
तुम पुरा ध्यान रखो
हारेगा अदृश्य शत्रु
विजयी होगा भारत
अखंड प्रकाशमय ज्योति जली
कोरोना से लड़ने एक सूत्र में
भारत की नाव चली

 लक्षमणसिंह सोढ़ा गाँव उण्डा
जिला जैसलमेर राजस्थान


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