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मेरे अल्फाज़

कोरोना दोहा एकादशी....

Mahavir Uttranchali

30 कविताएं

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कोरोना की मार से, होकर सब मजबूर
बैठे हैं बेकार हम, कामगार मज़दूर 

कोरोना के रोग ने, किया कुठाराघात
संकट पूरे विश्व में, चीन की खुराफ़ात 

कोरोना का वायरस, जीना हुआ हराम
आज सम्पूर्ण विश्व में, मच रहा कोहराम

कोरोना ने कर दिया, मानव को बीमार
वीटो पॉवर देश भी, दिखते हैं लाचार 

कोरोना को कह रहे, सब यम का अवतार
पूरे जग में मच रहा, इससे हा-हाकार 

कोई करता आरती, कोई जय-जयकार
कोरोना के ताप से, मचती हा-हाकार 

कैसा अजब निमोनिया, मानव को निपटाय
कोरोना के ताप से, भूख विदा हो जाय 

कोरोना के नाम को, जप आठों याम
निश्चित दूरी कीजिये, बोलिये राम-राम 

बड़े देश तबाह हुए, चीन राष्ट्र की खोट
कोरोना के रूप में, अर्थतन्त्र को चोट 

जग व्यापी व्यापार से, मची अनोखी होड़
मानव निर्मित वायरस, अर्थ व्यवस्था तोड़ 

स्वास्थ्य संगठन कह रहा, चीन को पाक-साफ़
आने वाली पीढ़ियाँ, हरगिज करें न माफ़ 

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