प्रकृति से प्रेम

                
                                                             
                            हम प्रकृति के है पुजारी है ,
                                                                     
                            
प्रकृति से ही प्रेम करते है ,
प्रकृति से ही जीते है ,
प्रकृति से ही मरते है ,
प्रकृति मनावता सिखलाती है,
नित ऊषा संध्या बेला में
अपना आंचल फैलाती है,
उसका अभिनन्दन करते है ,
उस आंचल में ही हम क्रीड़ा क्रंदन करते है
मानव हित कल्याण हेतु
हम प्रकृति वंदन करते है।।

 (मनीष प्रेम)

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1 year ago
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