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आन मिलो सजना

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

आन मिलो सजना, रंग-रंग के फूल खिले...

Manisha Joban

26 कविताएं

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अब आन मिलो सजना ….

रंगभरे गीतो की बहार में खिले हुए इस गीत के बारे में तो कहना ही क्या …!! ऋतुओं के बदलते ही खेत खलियानो में उमंग की वो लहरे दौड़ जाती है और सबका मन मचल उठता है। कुछ गाने को भारतीय गीतकारों ने हमारे उत्सवों को शब्दों की खूबसूरत लड़ियों में ऐसे पिरोकर बनाया है की हरेक दिल झूमकर गा उठता है।

रंग रंग के फूल खिले मोहे भाये कोई रंग ना..
हो, अब आन मिलो सजना

फसल काटते हुए सब मिलकर झूमते नाचते हैं और अपने प्रेमी की राह में दिल से निकली हुई फ़रियाद बहुत ही नाजुक भाव से इशारों में मिलने की आरज़ू बयाँ करती है और सामने से मिलन की आस में झूमता हुआ प्रेमी भी शिकायतों की झड़ी बरसा देता है और कहता है कि,

दीपक संग पतंगा नाचे, कोई मेरे संग ना ….ओ अब आन मिलो सजना

फिर भी प्रेमिका जुदाई के दिनों की अपनी परेशानियाँ गाकर सुनाती है और साथी सब….ओय सावा सावा...कहते सुर देते है…
सजना सजना सजना अब आन मिलो सजना

ढूंढ़ते तोहे तारों की छांव में ,कितने कांटे चुभे मेरे पांव में,
तूने सूरत दिखाई ना जालिमा
परदेसी हुआ रह के गांव में
होओ ओओ ओ.. हो...सावा सावा
प्रीत मीत बिन सुना सुना लागे मोरा अंगना
हो अब आन मिलो सजना ….

ये तो प्यार की इम्तेहान की हद ही हो गयी की नज़दीक होते हुए भी प्रेमी अपनी प्रेमिका से मिल नहीं पाता, इसी दुःख को बारबार कहती है तो वो भी न मिल पाने की वजह को कुछ इस तरह गाता है कि,

...आई बागों में फूलो की सवारीयाँ,मेले की हो गयी तैयारीयाँँ,
तेरा मेरा मिलन कब होगा मिली प्रीतम से सब पनिहारीयाँ,
हो ...ओ .... हो सावा सावा
दूर दूर रहकर जिने से मैं आ जाउं तंग ना
हो अब आन मिलो सजना ….

सब लोग मेले की और त्योहार की तैयारीयाँ कर रहे हैं लेकिन इन सबके बीच दो दिल तन्हाइ से तंग आ गये, ऐसी नाजूक पंक्तिया लिखकर हमारे गीतकार आनंद बक्षी ने इस पूरे गीत को दिलकश बना दिया है साथ में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का संगीत और सुमधुर बना रहा।

कैसे पूछुं मैं प्रेम की पहेलियाँ,संग होती है तेरी सहेलियाँ...

यानी उनके छुपे प्यार को कोई जान न जाए इसलिए उससे अकेले मिलने की चाह में सहेलियों से दूर होने का इंतज़ार करता रहता है, प्यार में उठने वाले सवालों के जवाब पूछना चाहता है अपनी प्रेमिका से

और प्रेम उत्सुक प्रेमिका जवाब देते हुए वो कहती है,
रात रात भर नींद ना आये खनखन खनके कंगना
अब आन मिलो सजना

1971 में आई आन मिलो सजना फिल्म का ये पंजाबी लोकगीत मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर की आवाज में राजेश खन्ना-आशा पारेख पर फिल्माया बहेतरीन नग्मा है,जो आज भी सबके दिलो पर छाया हूआ है।

 
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