आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Behana tum bua ban gayi ho

मेरे अल्फाज़

बहना तुम बुआ बन हो गयी हो

MOHD TASVIRUL ISLAM

69 कविताएं

23 Views
बहना तुम बुआ बन हो गयी हो
बच्चे की तुम दुआ बन गयी हो
ज़िम्मेदारी आन पड़ी है मुझ पर
नेकी की तुम दवा बन गई हो
किस्मत का है खेल निराला
जब चाहे बंद कर दे वो ताला
रब की नज़र काफी है मुझ पर
वो ही तो है सबका रखवाला
बच्चे किस्मत का फल होते
ना होते जब हम छुप छुप रोते
रब की इनायत है खुशफहमी
बच्चे रब की मूरत होते
बुआ का काम बढ़ाने वाला
बच्चा है नटखट गोपाला
सूरत रब की उसमे दिखती
प्यार से करता गड़बड़झाला
सेवा करे जो खाये मेवा
चेहरे पे उसके नूर कलेवा
मन रमता है सबका उसमे
बच्चे बुआ के दिल का देवा


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!