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मेरे अल्फाज़

शहर की जगमगाती ज़िन्दगी

MOHD TASVIRUL ISLAM

69 कविताएं

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शहर की जगमगाती ज़िन्दगी तुमको मुबारक
मुझे मेरे गांव की ठन्डी सलोनी शाम दे दो,
जहां नन्हें बच्चों को देख दिल मेरा उमड़ जाये
मुझे उन नन्हें मुन्नों को पढाने का काम दे दो

वो पीपल नीम की डाली की सुन्दर छांव दे दो
नंगे पाँव मिट्टी पर चलने का फरमान दे दो
वो सुन्दर खेत और खलिहान की मिट्टी से लग जाऊँ
माँ के हाथ की रोटी चटनी का साथ दे दो

बड़े कमरों मकानों का मुझे है यार क्या करना
मुझे मेरे गाँव की छोटे कमरों का साथ दे दो
खुली छत पर जहां मैं सो सकूं भर नींद
वही पुराना हौसला मन में पुराना भाव दे दो


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