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मेरे अल्फाज़

यादें

Mohini Pathik

13 कविताएं

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यूं ही यादों में किसी के,
खो गए हैं आजकल।
अपने जो थे अपने,
पराए हो गए हैं आजकल।।

ग़म नहीं मुझको है ये,
अपने,पराए क्यों हुए।
ग़म तो बस है एक ही,
किस बात से वो हो गए।।

कब कहां और क्यों मिले,
कुछ नहीं है याद हमको।
बस यही है याद मुझको,
राह में हम सब मिले थे।।

- मोहिनी पथिक
गोंडा, उत्तर प्रदेश

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