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मेरे अल्फाज़

हे भारत माता

Mukesh Kumar

6 कविताएं

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हे भारत माता तेरा अभिनन्दन
तेरी मिट्टी का कण-कण चन्दन

चाहूं तेरे चप्पे-चप्पे में हो उजियारा
दूध-दही की बहती रहे सदा नदी धारा

यहां के नेताओं को मिले सद्बुद्धि
विधर्मियों की हो जाये बस शुद्धि

कोई जन न कर पाये कभी क्रंदन
हे भारत माता तेरा अभिनन्दन

आतंकवाद-नक्सलवाद मिट जाये
राष्ट्रप्रेम का गीत घर-घर गाया जाये

मंदिर-मस्जिद में न हो कभी लड़ाई
हिंदू-मुस्लिम बनकर रहें यहां भाई-भाई

झूठ, कपट, छल, द्वेष का हो खंडन
हे भारत माता तेरा अभिनन्दन

सुभाष, भगत, बिस्मिल का स्वप्न हो साकार
दीन-दुखी, निबल-बिकल रहे न कोई लाचार

- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर,
फतेहाबाद, आगरा


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