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मेरे अल्फाज़

देश के नाम पैग़ाम

Namrata Srivastava

1 कविता

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वतन मेरे रूह हो तुम, जिस्मों जां कुर्बान यहीं ।
अभिमान तुम हमारा, स्वार्थ का सामान नहीं ।।
सम्मान तुम्हारा, ना झुकने देगें हम कभी ।
हर देशवासियों के नाम, देश का पैग़ाम यही ।।


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