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मेरे अल्फाज़

राष्ट्रधर्म है प्रथम सर्वदा

Narendra Kumar

81 कविताएं

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कुछ होते हैं तुल्य ,किन्तु,
कुछ ऐसे भी होते हैं |
जिनकी तुलना उचित नहीं ,
आदर्श प्रबल होते हैं |
उनके भी राहों में कण्टक ,
कठिन बिछाए जाते |
षडयंत्रो की कुटिल चाल में ,
सतत फँसाये जाते |

लेकिन तपकर ही तो सोना ,
कुंदन बन पाता है |
बुरे वक्त में साथ रहे वह,
मित्र परख जाता है ||
राष्ट्रधर्म है प्रथम सर्वदा ,
यह सोच कर्म करना होगा |
दुश्मन की नीच कुटिलता को ,
मिलकर निष्फल करना होगा |

----एन0के0दीक्षित ,डायरेक्टर, जेपीएस


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