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मेरे अल्फाज़

हम क्यों हो गए बड़े

Neelima Chaurasia

2 कविताएं

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हम क्यों हो गए बड़े बस यही सोच रहे हैं,

प्यार से उस बचपन को हर जगह खोज़ रहे हैं,

कभी पापा की डांट में,

कभी मां के प्यार में,

हमनें ढूंढी हर जगह वहीं मोहब्बत,

पर कहीं पा ना सकें,कभी दोस्तों की दोस्ती में,

और वो हर सच और झूठ में,

हमनें ढूंढी हर जगह वहीं शरारत,

पर कहीं पा ना सकें,

हम क्यों हो गए बड़े बस यही सोंच रहें हैं,

प्यार से उस बचपन को हर जगह खोज़ रहे हैं,

ढूंढा सिर्फ़ वहीं बचपन,

जिसमें ना था डर किसी का,

ना थीं उम्मीद किसी से,

सिर्फ़ थीं हमारी नादानियां और बेफिक्र बातें,

हम क्यों हो गए बड़े बस यहीं सोच रहे हैं,

हर रोज़ खुदा से सिर्फ़ यहीं पूंछ रहे हैं ।

- नीलिमा चौरसिया,नागदा


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