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मेरे अल्फाज़

कोरोना एवं धरती मां

Neeru Jain

12 कविताएं

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कहे कोरोना धरती मां से,
बता अब तेरा कैसा है हाल।
तेरा दुखदर्द बस मैंने जाना, नहीं समझेंगे तेरे लाल।
कौन है तू और क्यूं तूने अपने हाथ में लिया अख्तियार,
तेरी असहृय वेदना से जन्मा हूं मैं,
कहे कोई नाजायज तो कोई आविष्कार।
अपनी मां को सबकुछ माने, और सौदा तेरा करते फिरें,
क्या बीती होगी दिल पर तेरे, जब नाम पे तेरे कटे मरे।
समझ के अनपढ़ तुझे बच्चे तेरे, रोती छोड़ चले जाते थे विदेश।
पर तू है ममता की मारी ,मेरे डर से बुला लिया उनको स्वदेश।
कितनी मेहनत से तू पत्थर की ठोकर खाकर पानी लाती है ,
पर उसको गन्दा करने में इन्हें शर्म जरा नहीं आती है।
कुछ दिन तो आराम करले मां, जब तक मैं हूं तेरे साथ।
मेरे जाने के बाद कोई ना, पूछेगा फिर तेरा हाल।
देख लूंगा उन सबको मैं ,जो तेरी छाती पर मूंग दलेगा।
तुझको न्याय दिलाने खातिर , तेरे बच्चों से ही लड़ूंगा।
बोली मां हो जा तू शान्त, चाहे मेरा कुछ भी हो अन्जाम।
जो जैसा करता है करने दे , तू अपने सिर मत ले इल्जाम।
बनाकर वैक्सीन तेरे लाड़लो की खातिर मेरी आवाज़ दबा दी जाएगी,
पर कहता हूं मैं मां तुझे मेरी याद बहुत आएगी।
तुझे पता नहीं इन्होंने तेरी शैय्या के नीचे एटमबम लगाए हैं,
बड़ा बनाने को जिनको तूने, अपने सुख चैन गंवाए हैं।
कपूत ही फिक्र करता था मेरी, ये सोच के पछताएगी।
होकर गमगीन इक दिन , पत्थर से सर टकराएंगी।।


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