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मेरे अल्फाज़

माँ की ममता

Pankaj Kumar

6 कविताएं

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माँ की ममता --

वाह क्या क़ुदरत ने बनाया तेरा रूप
दिखता है तुझमें परमात्मा की स्वरुप
ममता से साचल है आँचल तेरा
मुहबत का रूप का हो तुम सवरुप
झुमता है बच्चों का भविष्य
रहता है परिवार का उमीद
इसलिए तो कहता है संसार साक्षात ईश्वर का रूप
वाह क्या क़ुदरत ने बनाया तेरा रूप

दर्द की साया में रह कर मुहब्बत बरसाती हो
लाख रहे प्रस्थितियाँ फिर भी मुस्कराती हो
शरद रातों में जाग कर खुद गरम कम्बल ओढाने आती हो
खुल जाऐ न नींद मे मेरी इसलिए चुपके से चली जाती हो
है तुम तो घर भी रौशनदार
रखती हो पुरे परिवार का मान्य और समान्य
वाह क्या क़ुदरत ने बनाया तेरा रूप
दिखता है तुझमें परमात्मा की सवरुप

Pankaj Kumar Aman
Gaya


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