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मेरे अल्फाज़

ग़म नहीं ख़ुशी दे मुझे

Parween Naz

54 कविताएं

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मानती हूँ दिल से अपना तुझे,
तू ग़म नहीं ख़ुशी दे मुझे।
मानती हूँ साझ नहीं सवेरा तुझे,
तू ग़म नहीं ख़ुशी दे मुझे।
मानती हूँ सबसे बढ़के तुझे,
तू ग़म नहीं ख़ुशी दे मुझे।
सोचती हूँ छोटे-छोटे लम्हे
जियूँ तेरे संग में,
तू ग़म नहीं ख़ुशी दे मुझे।
सोचती हूँ टूटे दिल को तू जोड़े मेरे,
तू ग़म नहीं ख़ुशी दे मुझे।
गुज़री जितनी रातें बिन तेरे,
लौटा उन्हें नहीं तू ग़म नहीं ख़ुशी दे मुझे।
बीत गए जो लम्हे बिन तेरे,
लौटा उन्हें नहीं तू थोड़ी सी ही
बस ख़ुशी दे मुझे।
मानती हूँ दिल से अपना तुझे,
तू ग़म नहीं ख़ुशी दे मुझे।


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