आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Achha rahega

मेरे अल्फाज़

अच्छा रहेगा

Poetry Prashant

12 कविताएं

256 Views
मेरी बात मानों तो अच्छा रहेगा
ग़ुमाने-हुस्न रहा है किसका रहेगा

ऐसा ना हो मैं मर जाऊं और ख़बर तक ना हो
यार कोई बता दो उसे तो अच्छा रहेगा

मुझसे मुख्तलिफ होकर ग़र उसे चाहते हो
फ़िर उसे ही चाहना तो अच्छा रहेगा

मुझे गलत लगता है उसका बातें छुपाना
वो खुली किताब रहे तो अच्छा रहेगा

मैं बहुत बुरा हूं मुझसे दूर रहो
तुम बेवफ़ा अच्छे रहोगे तो अच्छा रहेगा

एकतरफा मोहब्बत में हो तो अभी छोड़ दो
तुम ख़ुद में ज़िंदा रहोगे तो अच्छा रहेगा

ग़म है कि शबें नींदों की मुफलिसी में कटती हैं
इस ज़माने में तन्हा रहोगे तो अच्छा रहोगे

-प्रशांत मिश्रा


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!