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मेरे अल्फाज़

कौन अपना है और कौन पराया

Prachi Deepak

58 कविताएं

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कौन अपना है और कौन पराया
जब सोचने बैठी तब दिमाग ने बताया
जो हमको हसाए वही अपना है
फिर मैंने सोचा किस-किस ने मुझे हंसाया
तो मैंने बस इतना पाया
अधिकतर बार मुझे अजनबियो ने हंसाया
जब सहसा ही कोई हमें देख कर मुस्कुराए
और जवाब में हम वही हंसी लौटाएं
वही तो होती है सच्ची मुस्कुराहट
तो इसका मतलब यही हुआ ना
जो हमें बेमतलब हसाए
हमारी खुशी में खुश हो जाए
बस वही है अपना...

दोबारा ज़ब सोचा तो फिर जवाब आया
जो कभी ना रुलाए वही है अपना
फिर मैंने सोचा किस किसने रुलाया
मम्मी पापा बहन भाई सब ने रुलाया
पर मेरे रोने पर उन्हें भी रोता पाया
और फिर मुझे हंसाने की खातिर.,
उन्होंने अपना सब कुछ लुटाया
तो इसका मतलब यही हुआ ना
जो आप का रोना सहन ना कर पाए
आपको हंसाने को जग से लड़ जाए
बस वही है अपना.....

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