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मेरे अल्फाज़

मैंने देखा है

Prachi Deepak

40 कविताएं

363 Views
मैंने देखा है ......... .
ममता की लोरी को गाते,
सपनों को सहलाते देखा है ,
दिन रात मम्मी पापा को, बच्चों के लिए
मैंने एक बनाते देखा है।
मम्मी प्यार की मूरत हैं,
तो पापा त्याग की सूरत हैं,
मैंने तो इनको बच्चों पर,
संसार लूटाते देखा है ।
मम्मी को हाथ जलने पर भी,
बच्चों की पसंद का बनाते देखा है ,
पापा को हम बच्चों के लिए ,
घरबार सजाते देखा है ।
बच्चों की खुशी में मैंने ,
मम्मी पापा को,
बच्चों सा मुस्काते देखा है
बच्चों के छोटे से दुख पर उन्हें,
आँसू बहाते देखा है।
मम्मी ,दुनिया की वो पहली इंसान
जो बच्चों की आँखों में इक आँसू देख कर रो दे
पापा दुनिया के वो आखिरी इंसान
जो उस आँसू को मिटाने को अपना सब कुछ छोड़ दें
Love you मम्मी
Love you पापा
हमे तो ये तक कहना नहीं आता


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