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मेरे अल्फाज़

सपनों को मेरी उड़ान मिल गयी

pratibha sah

2 कविताएं

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आज सपनों को मेरी उड़ान मिल गयी,
मेरी चाहत को नयी पहचान मिल गयी,
हौसलों से कायम हूँ मैं आज,
ज़िन्दगी का करके नया आगाज़,
फिर आगे बढ़ने को नयी चाह मिल गयी,
आज सपनों को मेरी उड़ान मिल गयी...
ज़िन्दगी में मोड़ थे जाने कितने,
कोई भी न था साथ अपने,
फिर भी जंग जीतने को नयी राह मिल गयी,
आज सपनों को मेरी उड़ान मिल गयी....
ज़िन्दगी हमसे बेवफा थी शायद,
कुछ भी न करने की थी हम में क़वायत,
मेरे सारे ग़मो को तेरी प्यारी सी मुस्कान मिल गयी,
आज सपनों को मेरी उड़ान मिल गयी,
मेरी चाहत को नयी पहचान मिल गयी |


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