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मेरे अल्फाज़

और तुम प्रेम कविताएं लिख रहे हो

R. Himanshu

9 कविताएं

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कैसे लिख लेते हो,क्या तुम्हें
भय नहीं लगता

सच मुझे भय लगता है
किन्तु मृत्यु का नहीं

मुझे भय लगता है
इस बात से कि एक विषाणु
प्रेम को ख़त्म ना कर दे

मुझे भय लगता है
रिश्तों के मध्य दूरियां ना बढ़ जाएं

ऐसा ना हो कि हम प्रेम भूल जाएं,आतिथ्य भूल जाएं

क्यूंकि अगर ऐसा हुआ तो
कोई सेनेटाइजर
कोई वैक्सीन
सृष्टि को नहीं बचा पाएगा
बस..... इसीलिए प्रेम में हूं
प्रेम लिखता हूं....

-R.Himanshu 


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