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मेरे अल्फाज़

गरीबी समस्या कुचल डालती है

Rajeev Ranjan

73 कविताएं

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हे भगवन , हे ईश्वर
क्या हो रहा , हे जगदीश्वर
अदृश्य सूक्ष्म जीव जनित भय
गरीबी ने बनाया इससे भी निर्भय
गज़ब का है दृश्य
क्या है यही भविष्य
न हाथ में धन ,
न जाने को साधन
पेट में नहीं है अन्न
हजारों किलोमीटर की दूरी
पर जाने की है मजबूरी
हाथ से छूट गया है काम
तो एक ही रास्ता है
पहुंचे किसी तरह अपने धाम
सुनी सड़के
अपने घर पैदल ही जाने को
निकल पड़े है तड़के –तड़के
देखकर यह दृश्य
आंखे भर आती है
गरीबी समस्या कुचल डालती है
सावधानी और अलगाव तो है जरूरी
ईश्वर से है विनती दूर करे यह मजबूरी


राजीव रंजन शुक्ल


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