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मेरे अल्फाज़

हिन्दुस्तान

Rajeshwar Mandal

16 कविताएं

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बहुत हो गया हिन्दू मुस्लिम
छोड़ो अब यह अनर्गल राग
चलो सब मिल इंसान बनें
और मिटाएं चमन का दाग
एक ऐसी रीति बनाएं
समधर्म समभाव का गीत बनाएं
गीता कुरान को रख बक्से में
एक दूजे को मीत बनाएं
जब हो दीन धरम की बात
तेरी किताब मैं पढूं
मेरी किताब तू पढ़े
छोड़ छिद्रान्वेषण
कुछ अच्छा सा अर्थ गढ़ें
फतवा को फरमान लिखें
आरज़ू ,विनती को अरमान लिखें
रांची में रहीम रहे राम विराजे करांची में
पी ओ के से पी मिटाएं
वाघा बाॅर्डर का न व्यवधान रहे
प्रयोग ही सही पर राजेश्वर
दिल्ली से इस्लामाबाद तक
फिर से एक बार हिंदूस्तान लिखें

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