आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Firse sawan aaya hai

मेरे अल्फाज़

फिर से सावन आया है

Ritesh tiwari

59 कविताएं

207 Views
रिमझिम सी बरसी बूंदे कुछ इस कदर।
की धरती की प्यास बुझा गयी।।
उमरे बादलों को जब देखा आकास में मैंने।
तो पता चला कि सावन फिर से आ गयी।।

जब देखा नाचते मोर को जंगल में।
तो वो सुंदर दृश्य मन को लुभा गयी।।
कोयल की मीठी आवाज को सुन कानों में स्वर समा गयी।
की सावन इक बार फिर से झूम के आ गयी।।

दादुर को टरटराते सुन कर।
मन में अहसास ये आ जगी।।
जैसे कि पिछले सावन की बूंदों को फिर से।
अपने गानों में याद कर गुनगुना रहें।।

हरे भरे है सब पेड़ और पौधे।
खेत और खलियान सब लहलहा रहीं।।
बारिस की पहली बूंद को पाकर।
मानो प्रकृति जैसे हो मुस्कुरा रहीं।।

है पावन मास ये सावन की।
हर ओर भक्ति भाव को है दिखा रहीं।।
हर हर महादेव की गूंज को अब।
चारों दिशाओं में है सुना रहीं।।

रितेश तिवारी


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!