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मेरे अल्फाज़

तेरे जैसा

Rupa Shekhar

5 कविताएं

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एक दफा लगा मुझे कि,
दर्द माँग लू खुदा से, कोई ऐसा
कि ख्याल रखे कोई मेरा, बिल्कुल तेरे जैसा|
दर्द की रिवायत तो हम यूं ही सह लेंगे|
बस मिल जाता कोई, बिल्कुल तेरे जैसा|
आज धूप तो है, पर वो छतरी नही,
पैसे तो है, पर वो चाय की टपरी नहीं|
अब उन यादों पर एतबार कैसा?
उन तारों से प्यार कैसा?
पर तेरी चमक है, मेरी आँखों में,
तू अभी भी है कहीं, मेरी बातों में,
किसमें ढूंढू तुझे?
कोई नहीं है, तेरे जैसा?
कोई नहीं है, तेरे जैसा?

- रुपा शेखर 

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