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मेरे अल्फाज़

गीत : राम बड़ा मजबूर…

Sachin Kumar

13 कविताएं

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ओ सिया तेरा..., राम बड़ा मजबूर...
छोड़ अकेला तुमको प्रिये, जाना है बड़ी दूर….

बोली राम से सीता प्यारी
ऐसा क्या संकट है भारी
अभी तो कुछ भी कष्ट नहीं था
क्यों मन तोरा इतना भारी
कुछ तो बताओ नाथ मुझको,
क्यों जाना अति दूर...
ओ सिया तेरा... राम बड़ा मजबूर...


ओ सिया तेरा, राम बड़ा मजबूर
छोड़ अकेला तुमको प्रिये, जाना है बड़ी दूर….

सुन ओ सीते… प्राण प्यारी
जो माता कैकेयी है हमारी
मांगे उसने दो वचन हैं….
जो हम सब पर, हैं अति भारी
मुझको अब जाना है वन में
चौदह वर्ष अभी दूर….
ओ सिया तेरा, राम बड़ा मजबूर….


ओ सिया तेरा…. राम बड़ा मजबूर…..
छोड़ अकेला तुमको प्रिये, जाना है बड़ी दूर…. आगे पढ़ें

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