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मेरे अल्फाज़

अधूरी कविताएं

Sanjay bhatia

58 कविताएं

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जानते हो क्यों रह जाती हैं कुछ कविताएं अधूरी,
या तो शब्द नहीं मिल पाते या भावनाएं नहीं होती पूरी।
हर कविता का अपना इक सफ़र होता है,
सबको मिल जाये मंज़िलें ये ज़रूरी तो नहीं होता है,

राह-ए-मंज़िल कभी दुर्गम भी हो जाती है,
हो सकता है तभी कविता अधूरी रह जाती हो,
शब्दों का चयन भी कभी भावनाओं से नहीं जुड़ पाता,
लाख प्रयास करने पर भी तुक नहीं बन जाता

मन के भावुक प्रवाह को चाहिए अंतरंग शब्दों का साथ,
फिर कविता की पूर्णता में छा जाते हैं जज़्बात,
शब्द तो मन के उदगारों का करते हैं प्रतिनिधित्व,
उनको लय बद्ध कर संकलन ही है कविता का अस्तित्व,

हर कविता अपने पूर्ण रूप को पाना चाहती है,
कुछ अपनों की ही साजिश से अधूरी रह जाती है,
मैं करता हूं प्रयास कि हर रचना को उसका मुकाम दिलाऊं,
पर भटक जाता हूं कि उपयुक्त शब्द कहां से लाऊं,

इसीलिए रह जाती हैं मेरी कुछ कविताएं अधूरी,
दुआ करो सब दोस्त कि ,
इक दिन हों सब पूरी।
इक दिन हों सब पूरी।।

" संजय भाटिया "
डी एल एफ़ 3,गुरुग्राम।


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