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मेरे अल्फाज़

रावण तो अभी जिंदा है

Sanjeev Sharma

24 कविताएं

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आदर्श 'रावण' को बना लिया,
'बेशक' कहते सब गोविन्दा हैं।
राम आदर्श पर चलने वाले,
अब रह गए लोग चुनिंदा हैं।
मन भीतर संग्राम इस कदर
कि आत्मा तक शर्मिंदा हैं।
विजयदशमी आई कहां ?
रावण तो अभी जिंदा है!

-संजीव शर्मा
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खटौली ( पंचकूला)

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