आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Bolo yad kroge na

मेरे अल्फाज़

बोलो याद करोगे ना

Shweta Singh

35 कविताएं

289 Views
जब सावन ऋत पवन चलेगी
प्रणय का आयेगा मधुमास
भादों की जब घटा घिरेगी
पत्तों की छागल में भरे हुलास
बोलो याद करोगे ना

जब कुसुमित होगी फुलवारी
भर कर मेघ नीर लायेगा
मेरी तन्द्रा करने भंग
बोलो तुम आओगे ना

जब कोयल कुंकेगी वन में
सस्मित होंगे मेरे सपने
मंडरायेगी अभिलाषा
मेरे सूने हृदय निलय में
तब प्रेम का मेघ कारवां
लेकर तुम आओगे ना

बोलो याद करोगे ना

-- श्वेता सिंह


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!