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मेरे अल्फाज़

अल्फ़ाज़ - ए - मोहब्बत

Sunil Mishra

21 कविताएं

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तुम्हारे इश्क़ का जलवा, हकीकत में अजब देखा,
मेहरबां दिल हुआ तेरा, क़यामत इश्क़ ने देखा।
सितम ढाने में माहिर हो, नज़रों की नज़ाकत से,
तेरे हरफन से वाकिफ हूं, मैं तेरा क्या नहीं देखा।
तुम्हारी बस खता इतनी , छुपाया दिल से है मेरे,
मेरे अरमां भी तेरे हैं , लेकिन जिंदा नहीं देखा।
हजारों ख्वाहिशें दिल में, दफ़न तो हो गई मेरी,
मेरे मैय्यत के जलसे को, जहां में तुमने ही देखा।
तुम्हारी हर खुशी मेरी, सजा ये दिल की है मेरे,
मोहब्बत का सफ़र तन्हा, ये मेरा ग़म नहीं देखा
तुम्हें इस दिल ने चाहा था, खता इसमें नहीं मेरी।
हमारी बेबसी को भी , कभी दिल से नहीं देखा।
मेरी जिंदगी में तुम हो, इक राजे वफा मोहब्बत,
तुझे दिल से दुआ मेरी ,ये राजे दिल नहीं देखा।
तुम्हारी इस वफाई पर ,खुदा नज़रें करम बक्शे,
हमारी जिंदगी ने भी, तुम्हे तन्हा नहीं देखा।
तुम्हारे मयकदे में भी , जामे उल्फत है साकी,
तुम्हारे रिंद प्यासे हैं, ऐसा मयखाना नहीं देखा।
मुझे तो ग़म नहीं इसका तुझे तो ये वहम होगा,
ये "मेरे दिल आहट" है,ऐसा मंजर नहीं देखा।
तुम्हारे इश्क़ का जलवा, हकीकत में अजब देखा,
मेहरबां दिल हुआ तेरा , क़यामत इश्क़ ने देखा।

सुनील मिश्रा


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