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मेरे अल्फाज़

ख़ुशी से जीना जीवन

swati sharma

1 कविता

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किसी ने हमारी ख़ुशी देख हमसे पूछा
आपकी ख़ुशी की वजह क्या है

हमने कहा ये तो जान पाए हम खुद भी नहीं
उसने पूछा कोई तो वजह होगी ही

हमने कहा ये तो खुद के ग़मों को छुपाने की कला ही है
जिसने हमे आज इतना खुशमिजाज बनाया है

कोशिश रही की आँखों के आंसू कोई देख न पाए
चाह यही रही कि "उदास क्यों हो?" ये कोई पूछ न पाए

हम तो खुशिया बांटने आये है दुनिया में
रुलाने का काम हमे किसी ने सिखाया ही नहीं

खुदा ने भेजा था दुनिया में तब रुला ही दिया था
तो अब क्यों न अब पूरा जीवन हंसी में बिताया जाये

वापस उस खुदा के पास मुस्करा कर जायेंगे
उसका दिया सब यही छोड़ का जायेंगे

तो फिर किस बात का गम करना ,किस बात का रोना
चार पर जो दिए खुदा ने उसे ख़ुशी से जीना


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