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मेरे अल्फाज़

अँधेरे से मोहब्बत

Umang Gangania

18 कविताएं

238 Views
" अँधेरे से मोहब्बत "

अंधेरा, कितना भी गहरा क्यों न हो,
रोशनी, की एक छोटी सी किरण
काफी है,
उस अंधेरे को पार करने के लिए।
मैं समझती हूँ,
मेरा पारदर्शी होना
काफी है,
इस अँधेरे में खो जाने के लिए।
पानी सा अस्तित्व मेरा,
काफी है,
अपना रास्ता बनाने के लिए।
केवल रोशनी से मोहब्बत होना,
काफी नहीं।
अँधेरे से भी प्यार, बराबर होना चाहिए।
अंधेरे से ऐसी मोहब्बत ही क्या?
जो मजबूर न कर दे,
गुम होने के लिए।
एक पारदर्शी सा अंधेरा देखा मैंने।
और निकल पड़ी उमंग,
उस अँधेरे में,
गुम होने के लिए।
तुम वही अंधेरा हो,
जो सर्दियों की धुंध में नजर आता है।
दूर से डराने के लिए।
लेकिन जब उस कोहरे में हम सामाने लगते हैं।
रास्ता खुद ब खुद नजर आने लगता है,
मंजिल के लिए।

" नहीं जानती मैं!
इस अँधेरे ने कितने सवेरे देखे?
बस जानती हूँ मैं!
इस अँधेरे के आगोश में मैंने,
सुकून के पहरे देखे। "


- उमंग गंगानिया


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