आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Anndata

मेरे अल्फाज़

अन्नदाता

umesh shukla

85 कविताएं

136 Views
अन्नदाता जहाँ भी दुखी
रहे दुखी रहता वह देश

अन्नदात संपन्न जहाँ है वहाँ
नजर नहीं आते कभी क्लेश

सरकारों का कर्तव्य है के
रखें अन्नदाता का ध्यान

संकट से जो घिरा रहा वो
कष्ट भोगेगा सारा जहान

सियासत औ तंत्र की नजर
से रहता वह हमेशा ही दूर

पर देश के विकास में देता
है सदा ही योगदान भरपूर

राजनेताओं की करनी से
वह हमेशा रहता अंजान

इसी नाते बाधाएं घेरे रहती
हैं हर क्षण उसकी जान

ईश्वर से विनती यही दे सब
अन्नदाताओं को सन्मति

एकजुट हो संघर्ष कर वो
सुधार सकें अपनी स्थिति

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!