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मेरे अल्फाज़

ख्वाबों के क्षितिज पर

Vandana Agrawal

36 कविताएं

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यह कैसी चेतना है
जो लौट आई है
मेरे मानस पटल पर पुनः
जिसमें कोई नहीं है
बस मैं हूं तुम हो और
हमारी अनघटित प्यारी स्मृतियां
तुम्हारे अनछुए स्पर्शों का साथ
तुम्हारे अनकहे बातों का वार्तालाप
औ' ख्वाबों के क्षितिज पर
पुनः मिलने का इंतजार..

-वंदना अग्रवाल 'निराली'

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