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मेरे अल्फाज़

आना ही पडे़गा

Veena Gupta

45 कविताएं

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सदाएं रोशनी की,
रह रह कर आ रही हैं।
बाहें पसारे मंजिल,
तुझको बुला रही है।
कदम उठाना ही पड़ेगा।

नागफनियां बो दो,
मेरे रास्ते में दोस्तों,
मैं वो बागवान हूँ,
जिसे खिज़ा से उज़्र नहीं,
बहारों को आना पड़ेगा।

उम्र ज़ुल्मों की,
बहुत लंबी नहीं होती,
बोलती हैं चुप्पियां
गूंगी नहीं होती।
झूठ को हराना ही पड़ेगा।

नकाब रखे फिर रहा,
तू अपनी जेब में,
साथ देगा नहीं कोई,
तेरा इस फ़रेब में,
परदा उठाना ही पड़ेगा।

मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारे,
प्रेम का पावन पाठ पढ़ाकर,
इस जीवन का रूप संवारे
सिर झुकाना ही पड़ेगा ।

- वीणा गुप्त

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