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मेरे अल्फाज़

आंसू शबनम की बूंदें बन

Vineeta Tewari

74 कविताएं

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सखि क्यों वे मुझसे रूठ गए
क्यों सारे बंधन टूट गए
जल की मछली के हेतु
ज्यों सारे जलस्रोत ही सूख गए

आंसू शबनम की बूंदे बन
पीले पत्तों पर फूट गए

सखी वो क्यों मुझसे रूठ गए

सुख की यादों के सारे पल
यूँ अनायास ही छूट गए
सखी वो क्यों मुझसे रूठ गए

मैं ही अपराधिन सिद्ध हुई
दुनिया सारी विरुद्ध हुई
जाने क्यों सृष्टि मौन रही
हम भवसागर में डूब गए
सखि वो क्यों मुझसे रूठ गए

मुझको नितांत अकेला कर
तुम चले पंथ नया चुनकर
तेरी चालें भी खूब रहीं
हम अपनी जां से छूट गए

हम अमृतजल के बदले
जहरीला पानी घूंट गए

वह क्यों हमसे रूठ गए

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