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मेरे अल्फाज़

प्रेम की बात समझ क्यों न आयो

Vishwa Vijay

27 कविताएं

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प्रेम की बात समझ क्यों न आयो
टूट रह्यो नित क्यों अनुशासन
लट्ठ की मार पड़ी तन पर फिर...
भी नहि जाने... सख्त प्रशासन -1
सारो मानुष नहि ढीठ यहाँ पर
कुछ को मिलत नहिं खाने को राशन
पेट की आग लाचार करत जब
याद नहीं.. आवत अनुशासन -2
जो धन धान्य से पूर्ण यहाँ पर
रोज सिखावें वही अनुशासन
दीन, दुखी, मजदूर विकल हैं
पैदल ही चल दी घर आपन -3
निर्बल को न सहाई यहां .....
सबलों को कहें सब भाई है आपन
चाटुकारों की फौज यहाँ पर
जेब रखें अपने प्रशासन -4
कैसे सही कहें ऐसी... नीति को
बाँट दिया दो वर्ग दे ज्ञापन
परदेशी को विमान बुलायो
पैदलवालों पे कड़ा है प्रशासन -5
मान लियो यह देश बड़ो है
राजा के पास नहिं सब ज्ञातन
पर हर व्यक्ति को डंडा न मारो
दुखियों का पहुंचाओ घर आशन -6
अब इस संकट की बेला में
दूर पड्यो सबका हर आपन
“विश्वविजय” मन व्यथित सोची के
कितनों को नहि खाने को फाकन -7

-विश्व विजय

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