आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Kavi hirday vedana....

मेरे अल्फाज़

कवि ह्रदय वेदना .....

Yogesh Kumar

26 कविताएं

277 Views
कवि ह्रदय वेदना .....

आज के हालात पर
कुछ लिखना चाहता हूँ
कलम उठाता हूूूं, मगर
अल्फ़ाज़ों को लिख
सफा मैं फाड़ देता हूँ

सोचता हूँ लिखा
कुछ अगर मैंने तो
कुछ का कुछ
समझाया जाऊँगा
किसी के पक्ष में तो
विपक्ष में किसी के
ठहराया जाऊँगा
सोशल मीडिया, टी वी पर
सिक्के की तरह
उछाला जाऊँगा
किसी भी पार्टी का
होने से मैं
कैसे बच पाउँगा
किस तरह
निष्पक्ष अपने को
मैं रख पाउँगा

सोचता रहा यही सब
भावनाओं को अपनी मैं
कैसे व्यक्त कर पाउँगा
क्या कुछ मैं लिख पाउँगा ?

योगेश कुमार अग्रवाल


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Your Story has been saved!