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मेरे अल्फाज़

अब चाइना के हौंसले को चूर कर दीजिए

Zafaruddin Zafar

167 कविताएं

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गलतफहमी उसके मन की दूर कर दीजिए,
अब चाइना के हौसले को चूर कर दीजिए।

फिर से तिब्बत में लहराए हिन्द का परचम,
खर्च कुछ भी हो इतना ज़रूर कर दीजिए।

वो दुनिया भर को अपनी आंखें दिखाता है,
उसका गोलियों से छलनी ग़ुरूर कर दीजिए।

छिटपुट की लड़ाई में नुकसान अपना होगा,
एक बार में वार अपना भरपूर कर दीजिए।

ख़ुदा रोते हैं बिलखते हैं शहीदों के घरवाले,
उनके चेहरे पे खुशियों का नूर कर दीजिए।

खुद गिरता है रास्तों में गड्ढ़ा खोदने वाला,
हिन्द की पुरानी कहावत मशहूर कर दीजिए।

वो मुद्दत से चलाता है विस्तार वादी नीतियां,
उसकी सारी हसरतों को माज़ूर कर दीजिए।

साज़िश की धूल से लथपथ है उसका चेहरा,
दुनिया के सामने आईना बेकसूर कर दीजिए।

उसको पीने पिलाने की आदत नहीं फिर भी,
'ज़फ़र' को भी जीत का सरूर कर दीजिए।

-ज़फ़रुद्दीन"ज़फ़र"
एफ़-413,
कड़कड़डूमा कोर्ट,
दिल्ली-32

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