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मेरे अल्फाज़

लो जंग की तैयारियां हैं चाइना के साथ में

Zafaruddin Zafar

168 कविताएं

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बिखरी तमाम यारियां हैं चाइना के साथ में,
लो जंग की तैयारियां हैं चाइना के साथ में।

मंज़र कह नहीं सकते मगर देखते तो जाओ,
क़दम क़दम दुश्वारियां हैं चाइना के साथ में।

लम्बे चौड़े खेत वाले सब हमारे साथ आए,
छोटी-छोटी क्यारियां हैं चाइना के साथ में।

कुछ क़दम चल के उसे लौटना मुश्किल हुआ,
किस क़दर लाचारियां हैं चाइना के साथ में।

हम तो उसके दुश्मन हैं कौन समझाए फिर,
बेहद कंटीली झाड़ियां हैं चाइना के साथ में।

बुजुर्गो की दुआएं हैं हमारे फ़ौजियों के साथ,
सारे मुल्क की गालियां हैं चाइना के साथ में।

दो-चार दिन की जंग में फैसला हो जाएगा,
बे धार की कुल्हाड़ियां हैं चाइना के साथ में।

वक़्त कुछ भी लगे हिसाब हो मुकम्मल मगर,
ढूंढ़ लो कितनी घाटियां हैं चाइना के साथ में।

"ज़फ़र" भर दो जोश मुल्क की फ़ौजों में अब,
बेशक पाक मेहरबानियां हैं चाइना के साथ में।

-ज़फ़रुद्दीन"ज़फ़र"
एफ-413,
कड़कड़डूमा कोर्ट,
दिल्ली-32


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