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मेरे अल्फाज़

मुझे चाइना का कोई भी सामान नहीं चाहिए

Zafaruddin Zafar

176 कविताएं

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ये यूज़ एण्ड थ्रो की झूठी शान नहीं चाहिए,
मुझे चाइना का कोई भी सामान नहीं चाहिए।

वो भी किसी के लाल हैं उनका भी दिल है,
लाशों के ढेर पर हसरत परवान नहीं चाहिए।

चटनी से खा कर रोटियां ले लुंगा सारा लुत्फ,
मुझे मोमोज का थाली में निशान नहीं चाहिए।

वो सस्ता मिले या मंहगा अलग बात है मगर,
मुझे दुश्मनों के घर बना पानदान नहीं चाहिए।

जनता मांगती है बदला अपने बीस शहीदों का,
कागज़ में कोई सुलह का फरमान नहीं चाहिए।

हम सारी ज़िन्दगी जी लेंगे ख़ुशबू के बग़ैर भी,
मगर पलभर भी कांटों का तूफ़ान नहीं चाहिए।

झूला झूलना अच्छा है मगर ये तक समझ लो,
सरहद पर मुझे फ़ौज़ का अपमान नहीं चाहिए।

जिस तरफ़ भी देखता हूँ सियासी हैं तितलियां,
अब मेरे गुलशन को माली नादान नहीं चाहिए।

उसकी शेर की नज़र हो फौलाद का सीना हो,
ज़फ़र सोया हुआ मुल्क में दरबान नहीं चाहिए।

-ज़फ़रुद्दीन"ज़फ़र"
एफ -413,
कड़कड़डूमा कोर्ट,
दिल्ली-32


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