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मेरे अल्फाज़

आज़ादी के इस जश्न को मिलजुल कर मनाओ

Zeeshan Ansari

10 कविताएं

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नफ़रत के निशान हर इक दिल से मिटाओ
आज़ादी के इस जश्न की मिल जुल के मनाओ
है जान अगर प्यारी तो ए दुश्मनों सुन लो
नापाक निगाहें न तिरंगे पे उठाओ
आज़ादी का पैग़ाम हकीक़त में यही है
ये जात धर्म छोड़ो गले सबको लगाओ
है प्यार मुहब्बत ही तरक्की की ज़मानत
बापू का ये पैग़ाम ज़माने को सुनाओ
जो हम को बांटने की करें कोशिशें उनको
अशफ़ाक भगत सिंह का किस्सा तो सुनाओ
वो नन्हें नन्हें बच्चे हों या नौजवान हों
उन सबको बुजुर्गों की तवारीख बताओ
आज़ाद भगत सिंह की ये पाक जमीं है
तुम भूल से इस सिम्त निगाहें न उठाओ
अंग्रेज़ तो ज़ीशान गए हम हुए आज़ाद
अब मुल्क को गुरबत से भी आज़ाद कराओ


-- ज़ीशान इटावी


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