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Mohammed rafi all songs

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

जिन शब्दों को रफी की आवाज़ मिली वे शब्द लोगों की ज़ुबान पर चढ़ गए

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मोहम्मद रफ़ी यानी वह शख़्स जिनके गले से स्वयं देवता गायन करते थे। किसी न कहा था कि, - "अगर ईश्वर की आवाज़ कोई सुन सकता तो वह रफ़ी साहब जैसी होती।" सच ही है, जब भी उनके गीत कानों में पड़ते हैं तो लगता है कि किसी ने कानों में चाशनी घोल दी है। जिन शब्दों को उनकी आवाज़ मिली वह पसंदीदा हो गए। रफ़ी को पहला ब्रेक दिया था श्याम सुंदर ने पंजाबी फ़िल्म 'गुलबलोच' में। मुंबई की उनकी पहली फ़िल्म थी 'गांव की गोरी'। नौशाद और हुस्नलाल भगतराम ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उस ज़माने में शर्माजी के नाम से मशहूर आज के ख़य्याम ने फ़िल्म 'बीवी' में उनसे गीत गवाए।उन्होंने अपने जीवन में अनेक गीत गाए, उन्हीं में से कुछ गीतों की ख़ास पंक्तियां

गीतकार- गोपालदास नीरज 

कोई नगमा कहीं गूँजा, कहा दिल ने ये तू आई
कहीं चटकी कली कोई, मैं ये समझा तू शरमाई
कोई खुश्बू कहीं बिख़री, लगा ये ज़ुल्फ़ लहराई आगे पढ़ें

गीतकार: हसरत जयपुरी

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