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Ravindra jain film lyrics

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

रामायण में संगीत देने वाले पद्मश्री से सम्मानित रवीन्द्र जैन के लिखे मशहूर फ़िल्मी गीत

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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रामानन्द सागर की रामायण में जो मधुर आवाज़ आपने सुनी वह रवीन्द्र जैन की है। रवीन्द्र जैन बचपन से ही नेत्रहीन थे लेकिन संगीत के प्रति उनका विशिष्ट लगाव था। बहुत कम उम्र से ही वह मंदिरों में जाकर भजन गाने लगे थे। उनके पिता ने इसी लगन को देखते हुए उन्हें संगीत की विधिवत् शिक्षा के लिए भेजा। उन्होंने न सिर्फ़ अच्छा गाया बल्कि एक से बढ़कर एक संगीत भी दिया। उन्होंने बॉलीवुड के कई प्रसिद्ध गीत लिखे भी हैं। जानें कौन से हैं वह गीत जो उन्होंने लिखे भी और संगीत भी दिया।

नदिया के पार (1982) 

कौन दिसा में ले के चला रे बटुहिया
ए ठहर-ठहर, ये सुहानी सी डगर
जरा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नयना बाँधे ये डगरिया
कहीं गए जो ठहर, दिन जाएगा गुजर
गाड़ी हाँकन दे, हाँकन दे
कौन दिसा में...



पहली बार हम निकले हैं घर से
किसी अंजाने के संग हो
अनजाने से पहचान बढ़ेगी तो
महक उठेगा तोरा अंग हो
महक से तू कहीं बहक न जाना
न करना मोहे तंग हो
तंग करने का तोसे नाता है गुजरिया
हे ठहर ठहर...

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