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Shakeel badayuni ghazal mere hamnafas mere hamnava

वायरल

जब अयोध्या के साधुओं ने गायी शकील बदायूंनी की ग़ज़ल 'मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मशहूर शायर शकील बदायूंनी की ग़ज़ल को अयोध्या के एक साधु ने आवाज़ दी और लोगों ने उसे ख़ूब पसंद भी किया। इस वीडियो को रनवीर सिंह जी ने अपनी फ़ेसबुक वॉल पर साझा किया था और 1200 से ज़्यादा लोग इसे अब तक शेयर कर चुके हैं। आप भी पढ़ें वह ग़ज़ल व देखें वीडियो

मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जां-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे

मेरे दाग़-ए-दिल से है रौशनी इसी रौशनी से है ज़िंदगी
मुझे डर है ऐ मिरे चारा-गर ये चराग़ तू ही बुझा न दे



मुझे छोड़ दे मिरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मिरा दर्द और बढ़ा न दे

मेरा अज़्म इतना बुलंद है कि पराए शो'लों का डर नहीं
मुझे ख़ौफ़ आतिश-ए-गुल से है ये कहीं चमन को जला न दे

वो उठे हैं ले के ख़ुम-ओ-सुबू अरे ओ 'शकील' कहाँ है तू
तिरा जाम लेने को बज़्म में कोई और हाथ बढ़ा न दे

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