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सोशल मीडिया: कविता में स्मृति है या स्मृति में कविता...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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कविता में स्मृति है या स्मृति में कविता
नहीं जान सका मैं
और सोचता रहा कि मुझमें तुम हो या तुममें मैं

इत्र की तरह महकती रही वो दोपहर
जब मेरी आत्मा पर कील ठोंक दी थी तुमने
मेरा वज़ूद तुम्हारा मकान बन गया था
जिसके दरवाज़े पर तुम्हारे नाम की प्लेट गड़ी थी आगे पढ़ें

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