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तुम सुनाई देते हो हर जगह: फ़ान गोयथे

विश्व काव्य

तुम सुनाई देते हो हर जगह: फ़ान गोयथे

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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तुम सुनाई देते हो हर जगह
सूर्य खिल उठा अपनी नियत जगह से
आओगी तुम
यकीन है मुझे

मेरे बाग़ीचे में तुम आती हो
जैसे किसी गुलाब की रानी की मानिंद
लिली फूल के बीच हो तुम
लिली की तरह ही
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