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दवा कंपनियों का खेलः हर छह माह में 10 फीसदी बढ़ जाते हैं दवाओं के दाम

चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 16 Nov 2019 11:46 AM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर
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केस 1- 
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प्रसव के बाद दी जाने वाली डुफास्टन 10 एमजी का जनवरी में जारी होने वाले बैच की कीमत 566.79 रुपये थी। अगस्त में यह 623.46 रुपये हो गई।
केस 2- 
थायराइड के मरीजों को दी जाने वाली थायरोनॉर्म की जनवरी में कीमत 145 रुपये थी। यही दवा अगस्त में नए बैच के साथ जारी हुई तो इसकी कीमत 156.49 रुपये हो गई।
केस 3- 
मधुमेह रोगियों को दी जाने वाली जॉयरल एम के दाम जनवरी में 145.02 रुपये थे। अगस्त में यह 172.00 रुपये हो गए।
केस 4- 
माइग्रेन की दवा माइग्रनेक्स 10 एमजी बैच संख्या 0231 अगस्त में 49 रुपये की थी। बाजार में अक्तूबर माह में यह बैच संख्या 703 के साथ 51.87 रुपये की हो गई।

एक ओर सरकार दवाएं सस्ती करने का दावा करती हैं, वहीं हर छह माह में इनके दाम करीब 10 फीसदी बढ़ रहे हैं। इसकी बानगी ये उदाहरण हैं। दवा कंपनियां नए बैच नंबर के साथ कीमत बढ़ाने का खेल करती हैं। बाजार में दवाओं की मांग बढ़ते ही नया बैच जारी कर दिया जा रहा है।
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कंपनियां उत्पादन के हिसाब से तय करती हैं नया बैच नंबर

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